Thursday, October 15, 2009

एक फिल्म देखी


फ्रेंच फिल्म थी। सबटाइटिल्स के भरोसे देखता गया। असली टाइटिल था APRIMI IL CUORE. सबटाइटिल्स ऑन करने पर अंग्रेज़ी में तर्ज़ुमा आया OPEN MY HEART. अब कहानी पर आते हैं। दो युवतियां हैं। समलैंगिक। बाद में पता चलता है दोनों बहनें हैं। एक बड़ी, दूसरी छोटी। कई दृष्य स्थापित करते हैं कि बड़ी बहन छोटी को शारीरिक तौर पर इस्तेमाल करती है। वैसे उसका पूरा ख़याल भी रखती है। साथ ही वो मर्दों के साथ रिश्ते भी एंज्वॉय करती है। शायद प्रॉस्टीट्यूशन ही उसकी कमाई का ज़रिया है। छोटी एक डांस स्कूल में जाती है। बड़ी उसे लेने के लिए डांस स्कूल जाती है। रोज़ाना। डांस स्कूल के एक शख्स से बड़ी बात करती है, उसे घर बुलाती है। उसके साथ सेक्स करती है। छोटी के लिए सेक्स का मतलब है सिर्फ़ बड़ी बहन के साथ रात में सोते वक्त मिलनेवाला समलैंगिक अनुभव। वो शक्स एक रात जल्दी आ जाता है। मतलब बड़ी बहन के आने से पहले। कुछ ऐसा होता है कि वो छोटी के साथ शुरू हो जाता है। अचानक दरवाज़ा खुलता है और बड़ी बहन दाख़िल होती है। दोनों हड़बड़ी में दूर हो जाते हैं लेकिन बड़ी बहन को वस्तुस्थिति का कुछ-कुछ अंदाज़ा हो जाता है। बड़ी बहन पुरुष को कमरे में ले जाती है। उसके साथ संभोग करती है। उसके बाद वो छोटी बहन को बुलाती है। पुरुष के सामने उसे परोसती है। पुरुष छोटी बहन को भोगता है।
छोटी बहन उसे ज़्यादा पसंद आ जाती है। वो छोटी बहन के साथ सेटिंग करके रात के ऐसे कुछ घंटों के लिए घर आने लगता है जब बड़ी बहन बाहर होती है। दोनों वो करते हैं जिसे अंग्रेज़ी में 'मेकिंग लव' कहा जाता है। पुरुष उम्र में काफ़ी बड़ा है लेकिन ये रिस्क भरा सिलसिला काफ़ी दिनों तक चलता है और दोनों के बीच प्रेम उपजने लगता है। निर्देशक ने इस प्रेम को बड़ी ख़ूबसूरती से दिखाया है। इस बीच छोटी, बड़ी बहन से अपनी वैजाइना और पैर के बालों को शेव करने की, अच्छे कपड़े लाने की फ़रमाइश करती है। उसकी दुनिया बदल रही है। बड़ी बहन के साथ अब वो बिस्तर में नहीं जाना चाहती। सब कुछ किसी अनिष्ट की आशंका में ठीक चल रहा होता है। पुरुष उसकी कहानी सुनता है। छोटी बताती है कि वो बचपन से स्कूल नहीं गई लेकिन बड़ी बहन उसे घर में ही अच्छी अच्छी किताबें लाकर देती है। पुरुष उसे समझाता है कि बड़ी बहन ने भले ही तुम्हें पाल पोसकर बड़ा किया हो लेकिन वो तुम्हारे साथ नाइंसाफ़ी कर रही है। पुरुष उसे आज़ादी के, चांदनी रात मे समुद्र तट पर लेकर जाकर प्रेम करने के वादे करता है। लेकिन हाय रे नियति...एक रोज़ बड़ी को बिस्तर पर कुछ ऐसा मिलता है जिससे उसे संदेह होता है। एक दिन वो समय से पहले आती है। जोड़ा यौनरत है। खटके से चौंकता है। पुरुष कहता है तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारी बड़ी बहन से बात करूंगा। वो बाहर आता है। सफाई देना चाहता है लेकिन बड़ी बहन कहती है मुझे कोई सफ़ाई नहीं चाहिए। मैं तुम दोनों के लिए ख़ुश हूं। आओ सेलिब्रेट करते हैं। वो पुरुष को वाइन ऑफ़र करती है लेकिन वाइन में ज़हर मिला है। पुरुष मर जाता है। दोनों बहनें मिलकर (ज़ाहिर है छोटी बहन बहुत दुख के साथ, क्योंकि वो उससे प्रेम करती थी) उसके शव को पॉलिथीन में लपेटती हैं और एक कमरे में छुपा देती हैं। उसके बाद ये सिलसिला सा चल पड़ता है। बड़ी बहन पुरुषों को फंसा कर लाती है। छोटी बहन के साथ संभोग करने का सरप्राइज़ देती है और फ़िर ज़हर मिला वाइन पिला कर मार देती है। तीन पुरुष मारे जा चुके हैं और उनकी लाशें एक कमरे में छुपाई गई हैं। चौथा आता है तो उसे घर में बदबू महसूस होती है लेकिन उसे बहला लिया जाता है। वो भी मारा जाता है। एक दिन एक महिला आती है। अपने पति को खोजती हुई। रो रही है। कहती है उसका पति एक हफ़्ते से ग़ायब है। काम के लिए निकला, वापस नहीं आया। उसकी पैंट की ज़ेब से एक पर्चा मिला जिसमें जल्दबाज़ी में लिखा हुआ एक पता था, उसी आधार पर वहां आ गई। छोटी बहन कहती है मुझे नहीं पता, लेकिन अंदर ही अंदर वो अपराध बोध से भर जाती है।
उसके बाद एक रोज़ वो चाय में ज़हर मिलाकर बहन को पिला देती है। बड़ी निकल लेती है।
किस्सा ख़तम, पैसा हज़म।

Tuesday, March 31, 2009

स्मृति

अगर तुम्हारे पास दो पैसे हों
तो एक की रोटी ख़रीदो
दूसरे की किताब

"एक ही पैसा था
उसकी तो किताब ख़रीद ली
अब रोटी तुम्हारे भरोसे.."

मनीष थापा के लिए

तुम कहो तो मर भी जाऊं मैं
मगर इक शर्त है
बस कफ़न के वास्ते
आंचल तुम्हारा चाहिए

"तुम बोलेगा तो हम मर ज़ाएगा
लेकिन एक सरत ए
बस तुमारा कपन का वास्ते
आंचल चाइए"

Thursday, October 30, 2008

सुंदर

उसे बुरा नहीं लगता
उसे डर नहीं लगता
उसे भूख लगती है
और गुदगुदी

Friday, October 17, 2008

विस्मय

ऊ कहेन – हां !
हम कहा – नै !!
ऊ कहेन – हां s s !!
हम कहा – अच्छा s s s !!!

Wednesday, October 15, 2008

मेरा कुछ सामान

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है.. 
 टी-सिरीज के खाली कैसेट में 
एक-एक रुपए में रिकॉर्ड कराए कुछ गाने 
सारा प्यार तुम्हारा मैने.. 
पिघलता हुआ ये समां... 
दिल की गिरह खोल दो.. 
मुझे जां न कहो, मेरी जां.. 
राग झिंझोटी की एक बंदिश- 
सांवरे सलोने से लागे मोरे नैना 
सखी री तबसे जिया को पड़त नाहीं चैना.. 

 *** 
कुछ डायरियां हैं 
जिनमें बढ़ती उम्र के विस्मय बंद हैं 
किशोरावस्था के कनफेशंस, उत्तेजनाएं, कुंठाएं, सपने 
कुछ शहद में डूबे ख़त हैं 
कभी तुम्हारे तो कभी संत वलादीन के जन्मदिन पर लिखे हुए
जिनमें सिर्फ संबोधन लिखने के लिए एकांत में देर-देर तक सोचा है 
जिनमें सुंदर और स्नेहिल लिखने की कोशिश 
अपनी पराकाष्ठा पर है

*** 

कुछ किताबें जिनके किरदारों में हमारी छायाएं हैं 
जिनकी लाइनों को पेंसिल से अंडरलाइन करके 
हमने एक दूसरे तक अपनी बातें पहुंचाई हैं 
जिनमें अमृता है, इमरोज़ है 
‘अंबर की इक पाक सुराही, बादल का इक जाम उठाकर
 घूंट चांदनी पी है हमने, बात कुफ्र की की है हमने..’ 
या फिर. 
‘तेरा मिलना यूं होता है जैसे कोई हथेली पर दो वक्त की रोज़ी रख दे..’ 

 *** 

कुछ कच्ची सी अधूरी कविताएं हैं 
जिनमें जो कहा गया, ख़ूबसूरत है 
जो नहीं कहा जा सका, वो और ख़ूबसूरत 
जिनमें बदलते मौसम की कैफ़ियत पर चिपके अहसास हैं 
ट्रकों का धुआं मिली गर्म हवाए हैं 
बजाज के स्कूटर पर लगती सर्दी की कोंच है 
यूनिवर्सिटी रोड को भिगाती फुहारे हैं 
सिहरन है, शिथिलता है, ख़ुमारी है 
न हन्यते का यकीन है.. 

 ***

 फ्रेंच के प्यार भरे कुछ खुफ़िया शब्द 
Tu es fou 
Tu es hibou 
Je t'aime bocoup.. 
एक काग़ज़ है 
जिसपर हल्दी लगाकर तुमने हथेली की छाप बनाई थी 
भूपेन हजारिका का गीत है- 
ना कहो कोई मैं अकेला हूं मैं और मेरा साया, दो हैं दोनो हैं.. 

 *** 

 ये सब कुछ अब भी तुम्हारे पास है 
ये जानना, मानना एक अतार्किक संतोष देता है 
जब तक हो सके 
इन्हें अपने पास ही रखना

Friday, October 10, 2008

आस्था

बुधुआ ने अपने बच्चे का नाम रखा - राम आसरे
रोज़गार दफ़्तर में काम करनेवाले सीतल बाबू के बेटे का नाम है - विकास
और वो सामनेवाले बंगले में जो खन्ना साहब रहते हैं, उनके दो बच्चे हैं - सैंडी और हैप्पी