फुटकर नोट्स, वाह....आपकी लेखिनी में एक अलग ही सौन्दर्य है यथार्थ का....मुझे ये क्षणिकाएं बहुत अच्छी और जैसे कुछ-कुछ अपील करती नज़र आयी....ये कमेन्ट मोडरेशन से वर्ड वेरिफिकेशन हटा देंगे तो कमेन्ट देने में पाठकों को सहूलियत होगी....ब्लॉगजगत में आपका मै स्वागत करता हूँ....
मस्तमौला, यार-दोस्त टाइप साधारण सा इंसान हूं। दोस्त ज़्यादा नहीं हैं, जो हैं घनघोर हैं। आमतौर पर ख़ुश रहता हूं। दुखी होता हूं तो रातभर नींद नहीं आती। इलाहाबाद में रहते हुए गा लेना और थोड़ा बहुत लिख लेना दिल्ली में आकर सुन लेने और पढ़ लेने तक सिमट गया है। 2001 में ईटीवी के साथ टीवी न्यूज़ में कदम रखा, डरा सहमा था, स्टार न्यूज़ में ढाई साल के दौरान उस डर से मुक्त हो गया। पिछले कुछ सालों से इस काम में आनंद आता है। फिलहाल, एक जाने-माने हिंदी कारोबारी चैनल से जुड़ा हूं।
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फुटकर नोट्स, वाह....आपकी लेखिनी में एक अलग ही सौन्दर्य है यथार्थ का....मुझे ये क्षणिकाएं बहुत अच्छी और जैसे कुछ-कुछ अपील करती नज़र आयी....ये कमेन्ट मोडरेशन से वर्ड वेरिफिकेशन हटा देंगे तो कमेन्ट देने में पाठकों को सहूलियत होगी....ब्लॉगजगत में आपका मै स्वागत करता हूँ....
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