Tuesday, October 26, 2010

अर्हता

"यार, शराब पीकर लोग ऊल-जलूल हरकतें क्यों करते हैं...हम तो अच्छी और रचनात्मक बातें करते हैं....
मुझे लगता है.... शराब पीने के लिए एक न्यूनतम बौद्धिक अर्हता होनी चाहिए.."

बेजोड़

"बुख़ार, बदन दर्द तो है लेकिन जोड़ों में दर्द नहीं है, इसलिए ये डेंगू नहीं होगा.."

"जोड़ों में दर्द तो आपको हो ही नहीं सकता, क्योंकि आप बेजोड़ हैं "

Back Again

जज़्बातों, ख़यालातों, हालातों, काग़ज़ातों,
सादर सहित, सविनय सहित, सपरिवार सहित,
कृपया करके,
मरे हुए मृतकों..

नंदू

"काए रे नंदू,
ये अचानक नऊकरी-वऊकरी काए किया रे तू
कोई छोकरी-वोकरी का चक्कर ए क्या !!??"

Thursday, November 5, 2009

पूत के पांव

होनहार बच्चा
ज़रूरी नहीं कि बड़ा होकर कुछ महान करे
कामयाब और मशहूर आदमी
ज़रूरी नहीं कि बचपन में भी विलक्षण रहा हो

पूत के पांव वाला मुहावरा
प्रसिद्धि के पुजारियों ने गढ़ा है..

टैगलाइन

चेरी ब्लॉसम की टैगलाइन है
SHINE INDIA, SHINE
मतलब..

पहले कालिख पोतो
और फिर उस कालिख में चमको ?

Thursday, October 15, 2009

एक फिल्म देखी


फ्रेंच फिल्म थी। सबटाइटिल्स के भरोसे देखता गया। असली टाइटिल था APRIMI IL CUORE. सबटाइटिल्स ऑन करने पर अंग्रेज़ी में तर्ज़ुमा आया OPEN MY HEART. अब कहानी पर आते हैं। दो युवतियां हैं। समलैंगिक। बाद में पता चलता है दोनों बहनें हैं। एक बड़ी, दूसरी छोटी। कई दृष्य स्थापित करते हैं कि बड़ी बहन छोटी को शारीरिक तौर पर इस्तेमाल करती है। वैसे उसका पूरा ख़याल भी रखती है। साथ ही वो मर्दों के साथ रिश्ते भी एंज्वॉय करती है। शायद प्रॉस्टीट्यूशन ही उसकी कमाई का ज़रिया है। छोटी एक डांस स्कूल में जाती है। बड़ी उसे लेने के लिए डांस स्कूल जाती है। रोज़ाना। डांस स्कूल के एक शख्स से बड़ी बात करती है, उसे घर बुलाती है। उसके साथ सेक्स करती है। छोटी के लिए सेक्स का मतलब है सिर्फ़ बड़ी बहन के साथ रात में सोते वक्त मिलनेवाला समलैंगिक अनुभव। वो शक्स एक रात जल्दी आ जाता है। मतलब बड़ी बहन के आने से पहले। कुछ ऐसा होता है कि वो छोटी के साथ शुरू हो जाता है। अचानक दरवाज़ा खुलता है और बड़ी बहन दाख़िल होती है। दोनों हड़बड़ी में दूर हो जाते हैं लेकिन बड़ी बहन को वस्तुस्थिति का कुछ-कुछ अंदाज़ा हो जाता है। बड़ी बहन पुरुष को कमरे में ले जाती है। उसके साथ संभोग करती है। उसके बाद वो छोटी बहन को बुलाती है। पुरुष के सामने उसे परोसती है। पुरुष छोटी बहन को भोगता है।
छोटी बहन उसे ज़्यादा पसंद आ जाती है। वो छोटी बहन के साथ सेटिंग करके रात के ऐसे कुछ घंटों के लिए घर आने लगता है जब बड़ी बहन बाहर होती है। दोनों वो करते हैं जिसे अंग्रेज़ी में 'मेकिंग लव' कहा जाता है। पुरुष उम्र में काफ़ी बड़ा है लेकिन ये रिस्क भरा सिलसिला काफ़ी दिनों तक चलता है और दोनों के बीच प्रेम उपजने लगता है। निर्देशक ने इस प्रेम को बड़ी ख़ूबसूरती से दिखाया है। इस बीच छोटी, बड़ी बहन से अपनी वैजाइना और पैर के बालों को शेव करने की, अच्छे कपड़े लाने की फ़रमाइश करती है। उसकी दुनिया बदल रही है। बड़ी बहन के साथ अब वो बिस्तर में नहीं जाना चाहती। सब कुछ किसी अनिष्ट की आशंका में ठीक चल रहा होता है। पुरुष उसकी कहानी सुनता है। छोटी बताती है कि वो बचपन से स्कूल नहीं गई लेकिन बड़ी बहन उसे घर में ही अच्छी अच्छी किताबें लाकर देती है। पुरुष उसे समझाता है कि बड़ी बहन ने भले ही तुम्हें पाल पोसकर बड़ा किया हो लेकिन वो तुम्हारे साथ नाइंसाफ़ी कर रही है। पुरुष उसे आज़ादी के, चांदनी रात मे समुद्र तट पर लेकर जाकर प्रेम करने के वादे करता है। लेकिन हाय रे नियति...एक रोज़ बड़ी को बिस्तर पर कुछ ऐसा मिलता है जिससे उसे संदेह होता है। एक दिन वो समय से पहले आती है। जोड़ा यौनरत है। खटके से चौंकता है। पुरुष कहता है तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारी बड़ी बहन से बात करूंगा। वो बाहर आता है। सफाई देना चाहता है लेकिन बड़ी बहन कहती है मुझे कोई सफ़ाई नहीं चाहिए। मैं तुम दोनों के लिए ख़ुश हूं। आओ सेलिब्रेट करते हैं। वो पुरुष को वाइन ऑफ़र करती है लेकिन वाइन में ज़हर मिला है। पुरुष मर जाता है। दोनों बहनें मिलकर (ज़ाहिर है छोटी बहन बहुत दुख के साथ, क्योंकि वो उससे प्रेम करती थी) उसके शव को पॉलिथीन में लपेटती हैं और एक कमरे में छुपा देती हैं। उसके बाद ये सिलसिला सा चल पड़ता है। बड़ी बहन पुरुषों को फंसा कर लाती है। छोटी बहन के साथ संभोग करने का सरप्राइज़ देती है और फ़िर ज़हर मिला वाइन पिला कर मार देती है। तीन पुरुष मारे जा चुके हैं और उनकी लाशें एक कमरे में छुपाई गई हैं। चौथा आता है तो उसे घर में बदबू महसूस होती है लेकिन उसे बहला लिया जाता है। वो भी मारा जाता है। एक दिन एक महिला आती है। अपने पति को खोजती हुई। रो रही है। कहती है उसका पति एक हफ़्ते से ग़ायब है। काम के लिए निकला, वापस नहीं आया। उसकी पैंट की ज़ेब से एक पर्चा मिला जिसमें जल्दबाज़ी में लिखा हुआ एक पता था, उसी आधार पर वहां आ गई। छोटी बहन कहती है मुझे नहीं पता, लेकिन अंदर ही अंदर वो अपराध बोध से भर जाती है।
उसके बाद एक रोज़ वो चाय में ज़हर मिलाकर बहन को पिला देती है। बड़ी निकल लेती है।
किस्सा ख़तम, पैसा हज़म।