Thursday, October 30, 2008

सुंदर

उसे बुरा नहीं लगता
उसे डर नहीं लगता
उसे भूख लगती है
और गुदगुदी

Friday, October 17, 2008

विस्मय

ऊ कहेन – हां !
हम कहा – नै !!
ऊ कहेन – हां s s !!
हम कहा – अच्छा s s s !!!

Wednesday, October 15, 2008

मेरा कुछ सामान

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है.. 
 टी-सिरीज के खाली कैसेट में 
एक-एक रुपए में रिकॉर्ड कराए कुछ गाने 
सारा प्यार तुम्हारा मैने.. 
पिघलता हुआ ये समां... 
दिल की गिरह खोल दो.. 
मुझे जां न कहो, मेरी जां.. 
राग झिंझोटी की एक बंदिश- 
सांवरे सलोने से लागे मोरे नैना 
सखी री तबसे जिया को पड़त नाहीं चैना.. 

 *** 
कुछ डायरियां हैं 
जिनमें बढ़ती उम्र के विस्मय बंद हैं 
किशोरावस्था के कनफेशंस, उत्तेजनाएं, कुंठाएं, सपने 
कुछ शहद में डूबे ख़त हैं 
कभी तुम्हारे तो कभी संत वलादीन के जन्मदिन पर लिखे हुए
जिनमें सिर्फ संबोधन लिखने के लिए एकांत में देर-देर तक सोचा है 
जिनमें सुंदर और स्नेहिल लिखने की कोशिश 
अपनी पराकाष्ठा पर है

*** 

कुछ किताबें जिनके किरदारों में हमारी छायाएं हैं 
जिनकी लाइनों को पेंसिल से अंडरलाइन करके 
हमने एक दूसरे तक अपनी बातें पहुंचाई हैं 
जिनमें अमृता है, इमरोज़ है 
‘अंबर की इक पाक सुराही, बादल का इक जाम उठाकर
 घूंट चांदनी पी है हमने, बात कुफ्र की की है हमने..’ 
या फिर. 
‘तेरा मिलना यूं होता है जैसे कोई हथेली पर दो वक्त की रोज़ी रख दे..’ 

 *** 

कुछ कच्ची सी अधूरी कविताएं हैं 
जिनमें जो कहा गया, ख़ूबसूरत है 
जो नहीं कहा जा सका, वो और ख़ूबसूरत 
जिनमें बदलते मौसम की कैफ़ियत पर चिपके अहसास हैं 
ट्रकों का धुआं मिली गर्म हवाए हैं 
बजाज के स्कूटर पर लगती सर्दी की कोंच है 
यूनिवर्सिटी रोड को भिगाती फुहारे हैं 
सिहरन है, शिथिलता है, ख़ुमारी है 
न हन्यते का यकीन है.. 

 ***

 फ्रेंच के प्यार भरे कुछ खुफ़िया शब्द 
Tu es fou 
Tu es hibou 
Je t'aime bocoup.. 
एक काग़ज़ है 
जिसपर हल्दी लगाकर तुमने हथेली की छाप बनाई थी 
भूपेन हजारिका का गीत है- 
ना कहो कोई मैं अकेला हूं मैं और मेरा साया, दो हैं दोनो हैं.. 

 *** 

 ये सब कुछ अब भी तुम्हारे पास है 
ये जानना, मानना एक अतार्किक संतोष देता है 
जब तक हो सके 
इन्हें अपने पास ही रखना

Friday, October 10, 2008

आस्था

बुधुआ ने अपने बच्चे का नाम रखा - राम आसरे
रोज़गार दफ़्तर में काम करनेवाले सीतल बाबू के बेटे का नाम है - विकास
और वो सामनेवाले बंगले में जो खन्ना साहब रहते हैं, उनके दो बच्चे हैं - सैंडी और हैप्पी

नियति

ताल-पोखर सूख जाते हैं
समुंदर को नदियों का अनुदान मिलता रहता है
निरंतर